ब्रेकिंग
छत्तीसगढ राज्य की अन्य पिछ़ड़ा वर्ग की केन्द्रीय सूची में अहीर‘‘ के उपरांत ‘‘ रावत‘‘ एवं ... जमीन सौदे में बड़ा फर्जीवाड़ा, 25 लाख से अधिक की धोखाधड़ी के आरोप में दो पर FIR विकास कार्यों की सौगात: महापौर ने तीन वार्डों में सड़क, नाली और पुलिया निर्माण कार्यों का किया भूमिप... अब कम होगा ईंधन खर्च! भारत में आया E85 फ्लेक्स फ्यूल, जेब पर पड़ेगा कम बोझ सिर्फ 15 साल की उम्र में टीम इंडिया का टिकट, वैभव सूर्यवंशी ने रचा नया कीर्तिमान केशकाल घाट फोरलेन बायपास निर्माण में ढिलाई पर नाराज हुए अरुण साव, समय पर काम पूरा करने के निर्देश महंगाई भत्ते की मांग को लेकर 10 जून को प्रदर्शन, कर्मचारियों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचने की अपील मंत्री गजेन्द्र यादव से मिलीं महिला मोर्चा की नवनियुक्त पदाधिकारी, जताया आभार दुर्ग में 27 लाख की हार्वेस्टर धोखाधड़ी का खुलासा, अधिकृत डीलर गिरफ्तार दुर्ग पुलिस की बड़ी कार्यवाही रू 15 टन से अधिक कोयला जब्त, तीन आरोपी गिरफ्तार
देश

सेवा मामलों में राजनीतिक दखल पर सख्त रूख: दूरसंचार विभाग ने कर्मचारियों को दी चेतावनी

नई दिल्ली। दूरसंचार विभाग ने अपने कर्मचारियों को सेवा से जुड़े मामलों—विशेष रूप से ट्रांसफर और पोस्टिंग—में राजनीतिक या बाहरी प्रभाव का सहारा लेने के खिलाफ सख्त चेतावनी जारी की है। बुधवार को विभाग द्वारा जारी एक कार्यालय ज्ञापन में स्पष्ट किया गया कि ऐसे प्रयास केंद्रीय सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1964 के नियम 20 का उल्लंघन माने जाएंगे और आवश्यकतानुसार अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी।

ज्ञापन में कहा गया कि यह देखा गया है कि कुछ सरकारी कर्मचारी सीधे या अपने रिश्तेदारों तथा वार्डों के माध्यम से सांसदों या अन्य गणमान्य व्यक्तियों से सिफारिशें करवा रहे हैं, जिससे विभागीय निर्णयों को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। यह आचरण न केवल सेवा नियमों के विरुद्ध है, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता को भी ठेस पहुंचाता है।

दूरसंचार विभाग ने स्पष्ट किया कि यदि किसी कर्मचारी के मामले में किसी सांसद या अन्य व्यक्ति से कोई सिफारिश आती है, तो इसे यह मान लिया जाएगा कि उक्त सिफारिश कर्मचारी के कहने पर की गई है, और उसी आधार पर सेवा नियमों के अनुरूप कार्रवाई की जाएगी।

विभाग ने यह भी याद दिलाया कि पहले उल्लंघन पर औपचारिक सलाह दी जाती है, लेकिन बार-बार नियमों की अवहेलना करने पर अनुशासनात्मक प्रक्रिया अपनाई जाएगी, जिसमें सीसीएस (सीसीए) नियम, 1965 के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

कर्मचारियों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने सेवा संबंधी मामलों का समाधान केवल निर्धारित आधिकारिक माध्यमों से ही करें और किसी भी तरह की राजनीतिक या बाहरी सिफारिश से परहेज करें। इस कदम को प्रशासनिक प्रक्रियाओं में निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Slot Site
Back to top button